जमीनी नेता और बड़े कारोबारी स्वर्गीय तीरथ प्रसाद गुप्ता जी की अनसुनी कहानी

स्वर्गीय तीरथ प्रसाद गुप्ता (Late Teerath Prasad Gupta)


 जब भी अग्रहरी समाज के इतिहास और उसकी तरक्की की बात होती है, तो कई ऐसे व्यक्तित्व सामने आते हैं जिन्होंने संघर्ष, मेहनत और ईमानदारी के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई। उन्हीं में से एक अत्यंत सम्मानित नाम है स्वर्गीय तीरथ प्रसाद गुप्ता जी का।

अधिकांश लोग उन्हें केवल बड़े कारोबारी घराने श्याम ग्रुप के प्रेरणास्रोत या पूर्व सांसद स्वर्गीय श्याम चरण गुप्ता जी के पिता के रूप में जानते हैं। लेकिन उनका अपना व्यक्तित्व इससे कहीं बड़ा था। वे एक सफल व्यवसायी, लोकप्रिय जमीनी जननेता, अग्रहरी समाज के सम्मानित पदाधिकारी और समाजसेवी थे। उनका जीवन संघर्ष, सेवा, नेतृत्व और दूरदृष्टि की ऐसी मिसाल है, जो आज भी समाज को एकजुट रहने और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है।

जब जनता ने लगातार 5 बार सौंपी ब्लॉक प्रमुख की जिम्मेदारी

आज के समय में राजनीति का स्तर काफी बदल चुका है, लेकिन तीरथ प्रसाद जी उस दौर के नेता थे जब राजनीति सिर्फ जनता के भरोसे और सीधे जुड़ाव पर टिकी होती थी। वे अपने इलाके में इतने लोकप्रिय थे कि लोगों ने उन्हें लगातार 5 बार ब्लॉक प्रमुख चुना।

Teerath Prasad Gupta
पंचायत स्तर पर लगातार पांच बार चुनाव जीतना कोई छोटी बात नहीं होती। यह दिखाता है कि उनका अपने क्षेत्र के आम लोगों, किसानों और छोटे दुकानदारों के साथ कितना गहरा नाता था। वे हर किसी के सुख-दुख में खड़े होने वाले नेता थे। तीरथ जी की इसी जमीनी पकड़ और कार्यकर्ताओं के प्रति उनके प्रेम ने एक ऐसी मजबूत राजनैतिक जमीन तैयार की, जिसके दम पर उनके बेटे श्याम चरण गुप्ता जी आगे चलकर इलाहाबाद और बांदा से सांसद बने और पूरे देश में समाज का नाम रोशन किया।

व्यापारिक साम्राज्य के पीछे की असली प्रेरणा

तीरथ जी का मानना था कि व्यापार सिर्फ पैसा कमाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह समाज के लोगों को रोजगार देने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का एक माध्यम है। उनके इसी नजरिए और मार्गदर्शन की वजह से साल 1973 में उनके परिवार ने 'श्याम ग्रुप ऑफ कंपनीज' की नींव रखी।

शुरुआत बहुत छोटे स्तर पर बीड़ी बनाने (श्याम बीड़ी) के काम से हुई थी। तीरथ जी के अनुभव और सही सलाह के कारण यह काम इतनी तेजी से फैला कि देखते ही देखते यह उत्तर भारत के सबसे बड़े ब्रांड्स में शामिल हो गया। बाद में परिवार ने डेयरी सेक्टर में कदम रखा और 'श्याम डेयरी' की शुरुआत की, जिसने इलाके के हजारों किसानों को सीधे फायदा पहुँचाया। इसके बाद रियल एस्टेट और हॉस्पिटैलिटी में भी काम बढ़ा। इस पूरे सफर में तीरथ जी ने हमेशा एक ही बात सिखाई, काम कोई भी करो, उसमें ईमानदारी और साख सबसे जरूरी है।

साल 2004 का वो खौफनाक वाकया और तीरथ जी का हौसला

तीरथ जी के जीवन का एक ऐसा हिस्सा भी है जो आज भी लोगों के रोंगटे खड़े कर देता है। यह बात जनवरी 2004 की है। उस समय उनकी उम्र काफी ज्यादा थी और उनके बेटे सांसद थे। तीरथ जी मध्य प्रदेश के उमरिया से सतना की तरफ लौट रहे थे, तभी उचेहरा इलाके के पास कुछ हथियारों से लैस अपराधियों ने पुलिस चेकिंग का बहाना बनाकर उनकी गाड़ी को रुकवा लिया। बंदूक की नोक पर बदमाशों ने तीरथ जी और उनके ड्राइवर का अपहरण कर लिया।

अपहरणकर्ताओं ने उन्हें छोड़ने के बदले 5 करोड़ रुपये की भारी फिरौती मांगी थी। उस दौर में इस घटना ने पूरे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के व्यापारियों और आम जनता को हिलाकर रख दिया था। संकट के इस दौर में पूरे अग्रहरी समाज ने गजब की एकजुटता दिखाई थी और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थनाएं की थीं। मामला इतना बड़ा था कि मध्य प्रदेश की एसटीएफ और बिहार पुलिस को मिलकर काम करना पड़ा।

करीब 40 दिनों तक चले लंबे और बेहद तनावपूर्ण ऑपरेशन के बाद पुलिस ने उन्हें बिहार के पटना-औरंगाबाद वाले इलाके से सुरक्षित छुड़ाया। इस पूरे वाकये में सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इतनी ज्यादा उम्र होने और मौत के साए में 40 दिन बिताने के बाद भी तीरथ जी ने अपना मानसिक संतुलन और धैर्य नहीं खोया था। जब वे वापस आए, तो उनके चेहरे की शांति देखकर हर कोई हैरान था।

प्रेरणा

स्वर्गीय तीरथ प्रसाद गुप्ता जी ने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि एक व्यक्ति यदि ईमानदारी, मेहनत और समाजसेवा को अपना लक्ष्य बना ले, तो वह राजनीति, व्यापार और समाज, तीनों क्षेत्रों में अमिट पहचान बना सकता है।

वे एक सफल व्यवसायी, लोकप्रिय जननेता और सादगीपूर्ण व्यक्तित्व के धनी थे। 



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