प्यारी देवी (अग्रहरी): जब पूर्वांचल की एक महिला ने रचा इतिहास, बनीं गोरखपुर–महाराजगंज की पहली महिला विधायक


भारतीय राजनीति के शुरुआती दौर में महिला नेतृत्व की जब भी बात होती है, तो अक्सर राजघरानों या बड़े शहरों की महिलाओं का नाम ही सामने आता है। लेकिन पूर्वांचल का इतिहास एक अलग ही कहानी बयां करता है। एक ऐसे दौर में जब ग्रामीण महिलाओं का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल था, एक महिला ने सामाजिक बंधनों को तोड़कर जनता का नेतृत्व किया।

उनका नाम प्यारी देवी अग्रहरी था। उन्होंने अविभाजित गोरखपुर क्षेत्र (जो अब महाराजगंज जिला है) से पहली महिला विधायक बनकर एक नया इतिहास रचा था। वे न केवल गोरखपुर–महाराजगंज क्षेत्र की पहली महिला विधायक थीं, बल्कि अग्रहरी समाज से विधानसभा तक पहुँचने वाली पहली महिला विधायक भी थीं।

कौन थीं प्यारी देवी (अग्रहरी)

प्यारी देवी (Pyari Devi) एक शांत और दृढ़ इच्छाशक्ति वाली महिला थीं। उनका विवाह क्षेत्र के जाने-माने स्वतंत्रता सेनानी और जमीनी राजनेता गौरीराम गुप्ता से हुआ था।

जब गौरीराम गुप्ता आज़ादी की लड़ाई में अग्रिम पंक्ति में लड़ रहे थे, तब प्यारी देवी ने घर-परिवार संभाला और उनके हर फैसले का समर्थन किया। एक समर्पित समाज सुधारक के साथ जीवन बिताने के कारण उनके भीतर भी राजनीतिक चेतना और ग्रामीण मुद्दों की गहरी समझ विकसित हुई।

गौरीराम गुप्ता की राजनीतिक विरासत

प्यारी देवी के राजनीति में प्रवेश को समझने के लिए उनके पति के काम को जानना बेहद जरूरी है। गौरीराम गुप्ता (MLA Gauriram Gupta) स्थानीय राजनीति के एक बड़े स्तंभ थे।

उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया था। जब 1951-1952 में देश के पहले आम चुनाव हुए, तो जनता ने उन्हें फरेंदा विधानसभा क्षेत्र से उत्तर प्रदेश की पहली विधानसभा का सदस्य चुना। गौरीराम गुप्ता ने इस सीट पर तीन बार (1952, 1957 और 1967) जीत दर्ज की। उनकी साफ-सुथरी छवि ने जनता के बीच उनके परिवार के प्रति एक अटूट विश्वास पैदा कर दिया था।

1969 का ऐतिहासिक चुनाव

साल 1969 में फरेंदा क्षेत्र की राजनीति में एक बड़ा बदलाव आया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस राज्य विधानसभा चुनाव में प्यारी देवी अग्रहरी को अपना उम्मीदवार बनाया।


Former MLA Pyari Devi, w/o Gauram Gupta (MLA)

1960 के दशक के उत्तरार्ध में एक महिला के रूप में चुनाव प्रचार करना बेहद चुनौतीपूर्ण था। उस समय का ग्रामीण समाज काफी रूढ़िवादी था और महिला उम्मीदवारों का होना बहुत दुर्लभ माना जाता था। इन सब चुनौतियों के बावजूद प्यारी देवी ने जनता से सीधा संपर्क साधा और एक मजबूत चुनाव अभियान चलाया।

उन्होंने इस चुनाव में शानदार जीत हासिल की और दो बड़े कीर्तिमान स्थापित किए:

  • वह इस पूरे क्षेत्र के इतिहास में पहली महिला विधायक बनीं।

  • उन्होंने 1969 से 1974 तक फरेंदा निर्वाचन क्षेत्र का सफलतापूर्वक प्रतिनिधित्व किया और ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को सीधे लखनऊ विधानसभा तक पहुँचाया।

उस दौर में जब महिला साक्षरता दर बहुत कम थी और सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी न के बराबर थी, तब विधानसभा में उनकी उपस्थिति ने एक मौन क्रांति का काम किया। उन्होंने यह साबित कर दिया कि ग्रामीण महिलाएं भी शासन और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से संभाल सकती हैं।

Latest


EmoticonEmoticon