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| प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं पूर्व सांसद स्वर्गीय श्री श्यामाचरण गुप्ता |
अग्रहरि समाज के गौरव और भारत की राजनीति एवं व्यापार जगत के एक प्रतिष्ठित स्तंभ,श्यामा चरण गुप्ता (Shyama Charan Gupta) (9 फरवरी 1945 – 9 अप्रैल 2021) का व्यक्तित्व बहुमुखी प्रतिभा का धनी था। प्रयागराज (इलाहाबाद) की धरती से निकलकर देश की संसद तक का सफर तय करने वाले श्यामा चरण जी ने यह सिद्ध किया कि यदि इच्छाशक्ति प्रबल हो, तो एक साधारण व्यवसायी भी समाज और राष्ट्र निर्माण में असाधारण भूमिका निभा सकता है।
स्वर्गीय श्यामा चरण गुप्ता अग्रहरि समाज के उन विशिष्ट व्यक्तित्वों में से थे, जिनका जीवन साधारण परिस्थितियों से आरंभ होकर असाधारण ऊँचाइयों तक पहुँचा। वे एक सफल उद्यमी, कुशल राजनेता और समाज के प्रति गहन उत्तरदायित्व निभाने वाले युगद्रष्टा व्यक्ति थे। व्यापार और राजनीति, दोनों क्षेत्रों में उन्होंने अपने परिश्रम, सूझबूझ और जुझारूपन से स्थायी पहचान बनाई।
श्यामा चरण गुप्ता का जन्म 9 फरवरी 1945 को उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जनपद के मानिकपुर ब्लॉक अंतर्गत ऊँचडीह ग्राम में एक अग्रहरि वैश्य परिवार में हुआ। उनके पिता स्व. तीरथ प्रसाद गुप्त सादगी और श्रमशील जीवन के प्रतीक थे। अत्यंत पिछड़े और संसाधनविहीन क्षेत्र में जन्म लेने के बावजूद श्यामा चरण गुप्ता ने बचपन से ही अपनी मिट्टी, जंगल और परिवेश को बहुत निकट से देखा। गाँव के आसपास के जंगलों में तेंदू पत्ते की प्रचुर उपलब्धता ने उनके मन में आगे चलकर उद्यम की नींव रखी।
युवावस्था में उन्होंने मानिकपुर क्षेत्र से तेंदू पत्ते के माध्यम से बीड़ी निर्माण का कार्य छोटे स्तर पर प्रारंभ किया। पाठा क्षेत्र के जंगलों में तेंदू पत्ते का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता था। इसी संसाधन को आधार बनाकर उन्होंने अपने व्यवसाय को क्रमशः उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश तक विस्तारित किया। कुछ ही वर्षों में वे बीड़ी व्यापार के बड़े नामों में गिने जाने लगे।
सन 1973 में उन्होंने औपचारिक रूप से ‘श्याम ग्रुप (Shyama Group)’ की स्थापना की। समय के साथ यह समूह देश की जानी-मानी व्यावसायिक कंपनियों में शामिल हो गया।
प्रयागराज में स्थापित ‘होटल कान्हा श्याम’ उनके आधुनिक सोच और गुणवत्ता-केंद्रित दृष्टिकोण का प्रतीक बना। इसके साथ ही उन्होंने श्याम डेयरी, लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट और वेयरहाउसिंग जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भी अपने व्यापार का विस्तार किया। इस प्रकार श्यामा चरण गुप्ता ने सीमित संसाधनों से आरंभ कर एक सुदृढ़ और विविधतापूर्ण व्यावसायिक साम्राज्य खड़ा किया, जो उनकी उद्यमशीलता और अथक परिश्रम का प्रत्यक्ष प्रमाण है। बीड़ी उद्योग में उनके व्यापक प्रभाव और नेतृत्व के कारण उन्हें ‘बीड़ी किंग’ की उपाधि से संबोधित किया जाने लगा। वे श्याम ग्रुप ऑफ कंपनीज के संस्थापक एवं चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) रहे। व्यवसाय में बुलंदियों को छूते हुए भी वे अपनी जड़ों और समाज से सदैव जुड़े रहे।
राजनीति में उनका प्रवेश एक विशुद्ध व्यवसायी के रूप में सामाजिक सरोकारों के चलते हुआ। सन 1984 में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। उनका राजनीतिक जीवन प्रारंभ में स्वर्गीय संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी की पार्टी ‘संजय विचार मंच’ से शुरू हुआ, जहाँ से उन्हें तत्कालीन कर्वी विधानसभा सीट (बांदा जिला) से चुनाव लड़ने का अवसर मिला। यद्यपि पहले प्रयास में उन्हें पराजय मिली, किंतु उन्होंने राजनीति से पीछे हटने के बजाय अपने संघर्ष को और सशक्त बनाया।
इसके पश्चात उन्होंने इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज) को अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बनाया। सन 1989 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए नगर निगम इलाहाबाद के मेयर का पद प्राप्त किया और 1993 तक इस दायित्व का निर्वहन किया। इस दौरान उन्होंने नगर के प्रशासन, व्यापारिक वातावरण और नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सन 1991 में उन्होंने भाजपा के कमल निशान पर इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ा, किंतु सफलता नहीं मिली। सन 1995 में श्यामा चरण गुप्ता ने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर अपनी पत्नी श्रीमती जमुनोत्री गुप्ता को नगर निगम इलाहाबाद के मेयर पद का चुनाव लड़वाया। इसके पश्चात श्यामा चरण गुप्ता स्वयं भी भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव में उतरे, हालांकि यहाँ भी उन्हें विजय नहीं मिल सकी। इन अनुभवों ने उनके राजनीतिक दृष्टिकोण को और अधिक परिपक्व किया तथा संगठन, जनसंपर्क और चुनावी यथार्थ की गहरी समझ प्रदान की।
लोकसभा टिकट और संगठनात्मक मतभेदों को लेकर आगे चलकर उनके भाजपा नेतृत्व से मनमुटाव हुआ, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। समाजवादी पार्टी में उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारियाँ मिलीं और उनकी जमीनी पकड़ को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय सचिव भी मनोनीत किया गया। इस भूमिका में उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए, जो उस समय व्यापक चर्चा में रहे।
सन 2004 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर बांदा–चित्रकूट लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और विजयी होकर पहली बार भारत की संसद पहुँचे। यह केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी, बल्कि अग्रहरि समाज के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण था, जब समाज का एक प्रतिनिधि विश्व के सबसे बड़े गणतांत्रिक राष्ट्र के सर्वोच्च विधायी सदन तक पहुँचा। यह सफलता उनके वर्षों के राजनीतिक संघर्ष, संगठनात्मक क्षमता और जनविश्वास का प्रतिफल थी, जिसने अग्रहरि समाज को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान और गौरव प्रदान किया।
इसके पश्चात सन 2009 में समाजवादी पार्टी ने उन्हें फूलपुर (इलाहाबाद) लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, किंतु इस चुनाव में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा।
राजनीतिक जीवन के उतार-चढ़ावों के बीच उन्होंने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी में वापसी की। सन 2014 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर इलाहाबाद (अब प्रयागराज) संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा और समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी रेवती रमन सिंह को पराजित कर भारी मतों से सांसद निर्वाचित हुए। यह विजय उनके राजनीतिक जीवन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिनी जाती है।
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| सांसद श्यामचरण गुप्ता जी एक राजनैतिक कार्यक्रम के दौरान |
सन 2019 में उन्होंने पुनः समाजवादी पार्टी के टिकट पर बांदा से लोकसभा चुनाव लड़ा, किंतु इस बार उन्हें सफलता नहीं मिली। इस प्रकार उनका राजनीतिक जीवन निरंतर संघर्ष, परिवर्तन और सार्वजनिक स्वीकार्यता का सजीव उदाहरण बना रहा।
श्यामा चरण गुप्ता अग्रहरि वैश्य समुदाय से थे और समाज के प्रति उनका योगदान अत्यंत उल्लेखनीय रहा। वे सामाजिक कार्यों में सदैव सक्रिय रहे और अपनी सामर्थ्य के अनुसार समाज के कमजोर वर्गों की सहायता करते रहे। श्यामा चरण गुप्ता जी अपनी अग्रहरि वैश्य पहचान को लेकर सदैव गर्व का अनुभव करते थे और इसे उन्होंने केवल व्यक्तिगत गौरव तक सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना से जोड़ा। वे अखिल भारतीय अग्रहरि वैश्य समाज के मार्गदर्शक स्वरूप माने जाते थे और किसी भी अग्रहरि बंधु को सहायता की आवश्यकता होने पर वे आगे बढ़कर सहयोग करने के लिए सदैव तत्पर रहते थे। अपने सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन के माध्यम से उन्होंने यह प्रमाणित किया कि अग्रहरि समाज केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्र के नेतृत्व की पूर्ण क्षमता रखता है। वे अग्रहरि समाज के लिए एक बरगद के पेड़ के समान थे।
सन 2014 में मुंबई में आयोजित अखिल भारतीय अग्रहरि समाज के शताब्दी समारोह में श्यामा चरण गुप्ता जी की उपस्थिति समाज के लिए विशेष महत्व रखती थी। इस अवसर पर उन्होंने अग्रहरि समाज के लोगों से एक दूरदर्शी और प्रेरणादायी आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समाज का विकास तभी संभव है, जब उसकी सक्रिय भागीदारी राजनीति में भी हो। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह कोई मायने नहीं रखता कि कोई व्यक्ति किस राजनीतिक दल से जुड़ता है या किस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ता है; महत्वपूर्ण यह है कि अग्रहरि समाज के लोग आगे आएँ, चुनाव लड़ें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सहभागी बनें। उनके अनुसार, राजनीति में समाज की बढ़ती सहभागिता ही अग्रहरि समाज को संगठित शक्ति प्रदान करेगी और उसे विकास तथा राष्ट्रीय नेतृत्व की दिशा में अग्रसर करेगी।
श्यामा चरण गुप्ता जी का विवाह 4 फरवरी 1967 को श्रीमती जमुनोत्री देवी गुप्ता के साथ हुआ। उनका पारिवारिक जीवन सादगी, संस्कार और आपसी सम्मान पर आधारित था। उनके दो पुत्र, विदुप अग्रहरि और विभव अग्रहरि, तथा एक पुत्री वेणु अग्रहरि (डिंगरा) हैं।
उनके पुत्र विदुप अग्रहरि अपने पिता की भाँति व्यवसाय के साथ-साथ राजनीति में भी सक्रिय हैं, जबकि विभव अग्रहरि मुख्य रूप से व्यवसायिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। उनकी पुत्री वेणु अग्रहरि (ढींगरा) एक जानी-मानी समाजसेविका हैं और उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती जमुनोत्री देवी गुप्ता भी विभिन्न सामाजिक कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाती रही हैं।
कोरोना महामारी के दौरान श्याम चरण जी संक्रमित हो गए थे और उपचार चल रहा था। अप्रैल 2021 में उनके निधन का समाचार मिलते ही चित्रकूट, बांदा और प्रयागराज क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। ऊँचडीह जैसे छोटे से गाँव से निकलकर संसद तक पहुँचने वाले इस व्यक्तित्व का जाना देश और समाज के लिए एक गहरी क्षति थी।
अग्रहरि समाज अपने इस लाल पर सदैव गर्व करता रहेगा और उन्हें एक उद्यमशील, संघर्षशील तथा प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व के रूप में स्मरण करता रहेगा।
“कुछ लोग जीते नहीं, मिसाल बन जाते हैं,
कुछ नाम मिट जाते हैं, कुछ इतिहास बन जाते हैं।”





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