अग्रहरि समाज की साहित्यिक एवं पत्रिका परंपरा



आज जब संचार के अनगिनत आधुनिक माध्यम हमारे पास उपलब्ध हैं, तब शायद यह कल्पना करना कठिन है कि एक समय ऐसा भी था जब समाज को एक सूत्र में बाँधने, विचारों का आदान-प्रदान करने और सामाजिक चेतना को जीवित रखने का सबसे प्रभावी माध्यम केवल पत्र और पत्रिकाएँ हुआ करती थीं। संवाद किसी भी समाज को संगठित करता है, उसकी संस्कृति को सुरक्षित रखता है और आने वाली पीढ़ियों तक उसके विचारों को पहुँचाता है। इसी संवाद को सशक्त बनाए रखने के लिए अग्रहरि समाज के दूरदर्शी पूर्वजों ने समय-समय पर अनेक पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन प्रारंभ किया।

अग्रहरि समाज इस दृष्टि से सदैव दूरदर्शी रहा है। हमारे पूर्वजों ने बहुत पहले यह समझ लिया था कि यदि समाज को संगठित रखना है, सामाजिक गतिविधियों का प्रचार-प्रसार करना है, नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना है और देश के विभिन्न भागों में रहने वाले अग्रहरि परिवारों के बीच निरंतर संवाद बनाए रखना है, तो इसके लिए एक सशक्त माध्यम आवश्यक होगा। इसी सोच ने अग्रहरि समाज में पत्र-पत्रिकाओं की एक समृद्ध परंपरा को जन्म दिया।

इन पत्रिकाओं का उद्देश्य केवल समाचार प्रकाशित करना नहीं था। वे समाज के विचारों का मंच थीं, सामाजिक सुधार का माध्यम थीं, साहित्यिक अभिव्यक्ति का अवसर थीं और पूरे देश में फैले अग्रहरि समाज को एक सूत्र में बाँधने का सशक्त साधन थीं। विवाह, शिक्षा, समाज सुधार, धार्मिक आयोजन, व्यापार, युवाओं की उपलब्धियाँ, साहित्य, इतिहास, प्रेरक व्यक्तित्व और सामाजिक संदेश, जीवन का शायद ही कोई ऐसा पक्ष रहा हो जिसे इन पत्रिकाओं ने स्पर्श न किया हो।

यह भी उल्लेखनीय है कि अग्रहरि समाज की पत्रिका परंपरा केवल समाज के इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि भारतीय पत्र-पत्रिका इतिहास के अध्ययन में भी अपना एक विशिष्ट स्थान रखती है। बीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षों से लेकर आज तक समाज द्वारा निरंतर पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन इस बात का प्रमाण है कि सामुदायिक पत्रकारिता भारत की सामाजिक चेतना का एक महत्वपूर्ण आधार रही है। उस समय जब संचार के संसाधन सीमित थे, तब समाज के स्वयंसेवियों, साहित्यकारों और संपादकों ने अपने व्यक्तिगत प्रयासों से इन पत्रिकाओं का प्रकाशन कर ज्ञान, संवाद और संगठन की ऐसी परंपरा स्थापित की, जो आज भी प्रेरणा देती है।
शुरुआत जिसने इतिहास रचा

अग्रहरि समाज की संगठित पत्रकारिता की शुरुआत जनवरी 1921 में हुई, जब बिहार के मोतिहारी से स्वर्गीय वैद्यनाथ प्रसाद गुप्त 'विदेह' के संपादन में "अग्रहरि सेवक" मासिक पत्रिका प्रकाशित हुई। यह केवल समाज की पहली पत्रिका नहीं थी, बल्कि एक ऐसे वैचारिक आंदोलन का प्रारंभ थी जिसने आने वाले दशकों की दिशा निर्धारित की।

इसके बाद 1923 में स्वर्गीय गंगा सहाय गुप्त जी ने "अग्रहरि बंधु" मासिक पत्रिका का प्रकाशन आरंभ किया। वर्ष 1925 में तत्कालीन इलाहाबाद से स्वर्गीय भवानी प्रसाद गुप्ता जी के संपादन में "अग्रहरि जीवन" पाक्षिक पत्रिका प्रकाशित हुई। दो वर्ष बाद, 1927 में जौनपुर से स्वर्गीय रामनाथ मुनीम जी के संपादन में "अग्रहरि मित्र" का प्रकाशन प्रारंभ हुआ।

दिसंबर 1931 में स्वर्गीय वैद्यनाथ प्रसाद गुप्त 'विदेह' ने मोतिहारी से "विकास" मासिक पत्रिका का प्रकाशन किया। वर्ष 1938 में इलाहाबाद से स्वर्गीय भवानी प्रसाद हिप्स जी के संपादन में "अग्रहरि जीवन" मासिक तथा मार्च 1938 में स्वर्गीय मसूरियादीन गुप्त अग्रहरि के संपादन में "अग्रहरि मित्र" मासिक प्रकाशित हुई। नवंबर 1940 में रायबरेली से स्वर्गीय रामकृष्ण गुप्त अग्रहरि के संपादन में "अग्रहरि दूत" प्रकाशित हुई, जबकि 1941 में राजनांदगाँव से "अग्रहरि प्रचार पत्र" का प्रकाशन प्रारंभ हुआ।
स्वतंत्रता के बाद नई ऊर्जा

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद समाज में शिक्षा, संगठन और सामाजिक जागरूकता के नए आयाम जुड़े। जनवरी 1959 में गोरखपुर से श्रीमती गायत्री देवी जी के संपादन में "अग्रहरि ज्योति" प्रकाशित हुई। वर्ष 1962 में राजनांदगाँव से "अग्रहरि प्रभाकर" का प्रकाशन हुआ।

जनवरी 1966 अग्रहरि समाज की पत्रकारिता के इतिहास का एक महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध हुआ। इसी वर्ष श्री कैलाश चंद्र जी द्वारा "अग्रहरि समाज" मासिक पत्रिका का प्रकाशन प्रारंभ किया गया। समय के साथ यह पत्रिका समाज की सबसे प्रमुख और व्यापक पत्रिका बन गई। पिछले छह दशकों से भी अधिक समय से इसका नियमित प्रकाशन जारी है। कानपुर, जबलपुर, मिर्जापुर, दिल्ली, सतना और वर्तमान में प्रयागराज से इसका प्रकाशन होता रहा है तथा इसका वितरण देशभर में किया जाता है। निरंतरता, विषय-वस्तु और गुणवत्ता के कारण यह पत्रिका आज भी अग्रहरि समाज की सबसे प्रतिष्ठित सामाजिक पत्रिकाओं में गिनी जाती है।

वर्ष 1967 में जबलपुर से बाबू लक्ष्मण प्रसाद जी द्वारा "अग्रहरि मिलाप" त्रैमासिक तथा अप्रैल 1967 में बख्तियारपुर (पटना) से श्रीमती सावित्री देवी राजकुमार गुप्ता अग्रहरि के संपादन में "अग्रहरि संदेश" त्रैमासिक पत्रिका का प्रकाशन प्रारंभ हुआ।
नई पीढ़ी और नई दिशा

समय बदलता गया, लेकिन समाज की साहित्यिक चेतना कभी रुकी नहीं। मई 1992 में जबलपुर से इंजीनियर गणेश जी द्वारा "अग्रहरि वाणी" मासिक पत्रिका प्रकाशित हुई। वर्ष 2004 में महाराष्ट्र के परतवाड़ा, जनपद अमरावती, से श्री देवेंद्र कुमार के संपादन में "अग्रहरि संदेश" मासिक का प्रकाशन प्रारंभ हुआ।

इसके बाद वर्ष 2005 में स्वर्गीय प्रेम प्रकाश शास्त्री जी द्वारा जबलपुर से "संस्कार सौरभ", वर्ष 2006 में श्री किशन नारायण जी के संपादन में "संस्कार समुच्चय", तथा वर्ष 2009 में कानपुर से श्री सोमचंद जी के स्वामित्व एवं श्री नंदलाल जी तथा श्री राधेश्याम जी के संपादन में "अग्रहरि परिवार" मासिक पत्रिका का प्रकाशन हुआ। बाद में "अग्रहरि परिवार" का विलय "अग्रहरि समाज" पत्रिका में कर दिया गया।

केवल पत्रिकाएँ नहीं, समाज की जीवंत स्मृति

इन सभी पत्रिकाओं को यदि एक साथ देखा जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि ये केवल प्रकाशन नहीं थीं। ये समाज का इतिहास थीं, समाज की स्मृति थीं और समाज की आवाज़ थीं। इन्होंने उन घटनाओं को सुरक्षित रखा जो अन्यथा समय के साथ विलुप्त हो सकती थीं। आज यदि हम बीते दशकों के सामाजिक आयोजनों, व्यक्तित्वों, विचारों और उपलब्धियों को जान पाते हैं, तो उसमें इन पत्रिकाओं का अमूल्य योगदान है।

इन पत्रिकाओं ने समाज में साहित्यिक लेखन को प्रोत्साहन दिया, युवा लेखकों को मंच दिया, सामाजिक सुधारों पर चर्चा की, शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों का परिचय नई पीढ़ी से कराया। उन्होंने देश के अलग-अलग राज्यों में बसे अग्रहरि परिवारों के बीच आत्मीय संबंध बनाए रखने का कार्य किया और एक ऐसी वैचारिक एकता स्थापित की, जो भौगोलिक दूरियों से कहीं अधिक मजबूत थी।

भारतीय पत्रकारिता की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण विरासत
अग्रहरि समाज की पत्रिकाएँ केवल समाज की धरोहर नहीं हैं। भारतीय सामुदायिक पत्रकारिता और पत्र-पत्रिका इतिहास के संदर्भ में भी इनका विशेष महत्व है। लगभग एक शताब्दी से अधिक समय तक निरंतर प्रकाशित होती रही इतनी बड़ी पत्रिका परंपरा किसी भी समुदाय के लिए गर्व का विषय है। यह इस बात का प्रमाण है कि अग्रहरि समाज ने शिक्षा, साहित्य, संगठन और सामाजिक जागरूकता को सदैव सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

आज जब सूचना का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है, तब भी इन पत्रिकाओं की विरासत उतनी ही प्रेरणादायक है। इन्होंने यह सिद्ध किया कि समाज को मजबूत बनाने के लिए केवल संगठन पर्याप्त नहीं होता, बल्कि निरंतर संवाद, विचारों का आदान-प्रदान और ज्ञान का प्रसार भी उतना ही आवश्यक है।

अग्रहरि समाज की पत्रिकाओं का इतिहास वास्तव में समाज की सामूहिक चेतना, संगठन, साहित्य, सेवा और समर्पण का इतिहास है। यह उन दूरदर्शी पूर्वजों को हमारी विनम्र श्रद्धांजलि भी है, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद कलम को समाज की सबसे बड़ी शक्ति बनाया और आने वाली पीढ़ियों के लिए विचारों की ऐसी अमूल्य धरोहर छोड़ गए, जिस पर प्रत्येक अग्रहरि परिवार को गर्व होना चाहिए।

अग्रहरि समाज की प्रमुख पत्रिकाओं का कालक्रम

क्रमांक

पत्रिका का नाम

प्रारंभ वर्ष

आवृत्ति

संपादक

प्रकाशन स्थल

1

अग्रहरि सेवक

जनवरी 1921

मासिक

स्व. वैद्यनाथ प्रसाद गुप्त 'विदेह'

मोतिहारी, बिहार

2

अग्रहरि बंधु

1923

मासिक

स्व. गंगा सहाय गुप्त

उपलब्ध नहीं

3

अग्रहरि जीवन

1925

पाक्षिक

स्व. भवानी प्रसाद गुप्ता

इलाहाबाद

4

अग्रहरि मित्र

1927

पाक्षिक

स्व. रामनाथ मुनीम

जौनपुर

5

विकास

दिसंबर 1931

मासिक

स्व. वैद्यनाथ प्रसाद गुप्त 'विदेह'

मोतिहारी, बिहार

6

अग्रहरि जीवन

1938

मासिक

स्व. भवानी प्रसाद हिप्स

इलाहाबाद

7

अग्रहरि मित्र

मार्च 1938

मासिक

स्व. मसूरियादीन गुप्त अग्रहरि

इलाहाबाद

8

अग्रहरि दूत

नवंबर 1940

मासिक

स्व. रामकृष्ण गुप्त अग्रहरि

रायबरेली

9

अग्रहरि प्रचार पत्र

1941

मासिक

जानकारी उपलब्ध नहीं

राजनांदगाँव, छत्तीसगढ़

10

अग्रहरि ज्योति

जनवरी 1959

मासिक

श्रीमती गायत्री देवी

गोरखपुर

11

अग्रहरि प्रभाकर

1962

जानकारी उपलब्ध नहीं

जानकारी उपलब्ध नहीं

राजनांदगाँव

12

अग्रहरि समाज

जनवरी 1966

मासिक

श्री कैलाश चंद्र

प्रारंभिक प्रकाशन विभिन्न नगरों से, वर्तमान में प्रयागराज

13

अग्रहरि मिलाप

1967

त्रैमासिक

बाबू लक्ष्मण प्रसाद

जबलपुर

14

अग्रहरि संदेश

अप्रैल 1967

त्रैमासिक

श्रीमती सावित्री देवी राजकुमार गुप्ता अग्रहरि

बख्तियारपुर, पटना

15

अग्रहरि वाणी

मई 1992

मासिक

इंजीनियर गणेश जी

जबलपुर

16

अग्रहरि संदेश

2004

मासिक

श्री देवेंद्र कुमार

परतवाड़ा, अमरावती, महाराष्ट्र

17

संस्कार सौरभ

2005

जानकारी उपलब्ध नहीं

स्व. प्रेम प्रकाश शास्त्री

जबलपुर

18

संस्कार समुच्चय

2006

मासिक

श्री किशन नारायण

जबलपुर

19

अग्रहरि परिवार

2009

मासिक

श्री नंदलाल एवं श्री राधेश्याम (स्वामित्व: श्री सोमचंद)

कानपुर




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